"ऋग्वेदः सूक्तं ४.१५" इत्यस्य संस्करणे भेदः

(लघु)
Yann ४, ॥ : replace
(लघु) (Yann ४, ॥ : replace)
अग्निर होता नो अध्वरे वाजी सन परि णीयते |
देवो देवेषु यज्ञियः ||
परि तरिविष्ट्य अध्वरं यात्य अग्नी रथीर इव |
आ देवेषु परयो दधत ||
परि वाजपतिः कविर अग्निर हव्यान्य अक्रमीत |
दधद रत्नानि दाशुषे ||
अयं यः सर्ञ्जये पुरो दैववाते समिध्यते |
दयुमां अमित्रदम्भनः ||
अस्य घा वीर ईवतो ऽगनेर ईशीत मर्त्यः |
तिग्मजम्भस्य मीळ्हुषः ||
 
तम अर्वन्तं न सानसिम अरुषं न दिवः शिशुम |
मर्म्र्ज्यन्ते दिवे-दिवे ||
बोधद यन मा हरिभ्यां कुमारः साहदेव्यः |
अछा न हूत उद अरम ||
उत तया यजता हरी कुमारात साहदेव्यात |
परयता सद्य आ ददे ||
एष वां देवाव अश्विना कुमारः साहदेव्यः |
दीर्घायुर अस्तु सोमकः ||
तं युवं देवाव अश्विना कुमारं साहदेव्यम |
दीर्घायुषं कर्णोतन ||

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