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अ. १ आ. १ सू. ८

अं०९ आ०९ ०४

से होता है । जैसे घूम से अग्रि के अनुमान मे वाक्यप्रयोग 'इस प्रकार होगा !

, पर्वत.अग्रिमान् है, (प्रतिज्ञा) क्योंकि धूम वाला है.(हेतु) रसोई की तरह (उदाहण) यहां धूम कार्य है, उस से घूम के कारण अग्रि का अनुमान है । धूम और अग्रि में कार्यकारण सम्वन्ध है, इस का परिचायक उदाहरण रसोई है, क्योंकि वहां अग्रि और धूम का कार्यकारण भाव मम्बन्ध प्रत्यक्षदृष्ट है । कार्यकारणभावसम्बन्ध उपलक्षण है, इसी प्रकार संयोग सम्बन्ध विरोध सम्वन्ध, समवाय सम्वन्ध और एकार्थ समवाय सम्बन्ध भी उदाहरण से जाने जाते हैं।

एतेन शाब्दं व्यख्यातम् ॥ ३ ॥

इस स वाव्दजन्य ज्ञान व्याख्या कया गया ।

व्या-कणाद के मत में दो ही प्रमाण हैं मयक्ष और अनु मान । शाब्द भी अनुमान के ही अन्तर्गत है, कोई अलग प्रमाण नहीं । क्योंकि जैसे लिङ्ग को देखकर लिङ्गी का ज्ञान होता है, वैसे ही शब्द को सुनकर उस के संकेतित अर्थ का अनुमान होता है, कि इस अर्थ को बोधन करने के लिए इसने ये शाब्द कहे हैं। आगे यह जो कुछ कह रहा है, सच कह रहा है वा झूठ कह रहा है । यह निश्चय वा संशय कहने वाले की योग्यता अयेाग्यता के ज्ञान से होता है, इसलिए यह भी अनुमान के अन्तर्गत है।

हेतुरपदेशेो लिङ्गे प्रमाण करणमित्यनर्थान्त