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'वैशेषिक-दर्शन ।

वैशेषिक-दर्शन । अर्थ-पृथिवी, जल, तेज, वायु, आकाश, काल, दिशा,

आत्मा, मन, ये (९) द्रव्य हैं।

क्रमशः-सूक्ष्म होने से पृथिवी, जल, तेज, वायु, आकाश क्रमशः कहे । पीछे लोकप्रसिद्ध काल और दिशा । अनन्तर चेतन आत्मा, और आत्मा के साथ नियत रहने से पीछे मन । प्रश्न-तम (अन्धकार) भी-तो एक द्रव्य है, क्योंकिगुण क्रिया-वाला द्रव्य होता है। औरतम-काळा होता है, यह तम में गुण है, और चलता है, यहउसमें क्रिया है। और जो ९ द्रव्य ऊपर कहे हैं, उन के अन्दर यह आ सकता नहीं, क्योकि वायु, आकाश, काल, दिशा, आत्मा, मन, तो रूपवाले नहीं, और तम रूपवाला होता है, इसलिए इन के अन्तर्गन नहीं, रहे पृथिवी, जल, तेज, उन को हम आंखों से तव देखते हैं। जव वे प्रकाश से युक्त हों। और तमउलटा तव दीखता है, जव प्रकाश न हो, इसलिए यह पृथिवी जल तेज के अन्तर्गत भी नहीं, अतः एव यह एक अलग ही दसवां द्रव्य सिद्ध होता है ।.

उत्तर-प्रकाश का अभाव ही तम है, और कुछ नहीं। उस में क्रिया की प्रतीति भ्रान्ति है। जव प्रदीप लेकर चलते हैं, तो ज्यों २प्रकाशा आगे २वढ़ता जाता और पीछे २ से हटता आता है, त्यों २ तम भाग २ भागता जाता और पछेि २ दौड़ता आता मतीत होता है। वस्तुतः वहं दौड़ प्रकाश की ही है, भकाशा के होते तम मिट जाता है, और प्रकाशा के इटते तम होता-आता है। इस प्रकार क्रियाउस में भूल से प्रतीत होती ' है । रूप की-मतीति भी भ्रान्ति है, रूप को नेत्र तभी देखते हैं,