पृष्ठम्:वैशेषिकदर्शनम्.djvu/६९

एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति
६७
अ. १ आ. १ सू. ८

प्रसिद्ध इन्द्रियों के विषय ।

व्या-नेत्रं, रसना, घ्राण, त्वचा और श्रोत्रये पांच इन्द्रिय हैं, इन पाचों के क्रमवाः रूप, रस, गन्ध, स्पर्श और शब्द थे पंच विषय भसिद्ध हैं । अर्थात् सच के मत्यक्ष सिद्ध है।

संगति-इस प्रत्यक्ष सिद्धि का आत्म परीक्षा में उपयोग दिख लाते हैं

इंद्रियार्थप्रसिद्धिरिन्द्रियार्थेभ्योऽर्थान्तरस्य हेतु२

इन्द्रियों के विषयों की भमिद्धि इन्द्रियों और विषयों म भिन्न अर्थ.का हेतु है ।

व्या-यह जो इन्द्रियों द्वारा विषयों का मत्यक्ष ज्ञान , यह गुण है, अतएव किसी द्रव्य के आश्रित होना चाहिये, जो उस का आश्रय द्रव्य है, वही- आत्मा है।

सगति-ज्ञान शरीर के आश्रय है, क्योंकि वह शरीर का कार्य है, इस अनुमान ने जब शान का आश्रय शरीर निश्चित हो गया, . तो भिन्न आत्मा की सिद्धिनही होगी, इस आक्षेप का उत्तर देते हैं।

सोऽनपदेशः ॥ ३ ॥

वह अहेतु (हेत्वाभाभ ) है । , , व्या-शारीर को ज्ञान का आश्रय सिद्ध करने के लिए यह जो हेतु दिया है, कि ज्ञान शरीर का कार्य है, यह'हेतु ही नहीं, क्योंकि ज्ञान शारीर का कार्य है, यही वात सिद्ध नहीं हो सकती, और जो स्वयं असिद्ध है, वह किसी का साधक कैसे हो सकता है, क्योंकि - .. '