पृष्ठम्:श्रीपाञ्चरात्ररक्षा.djvu/२५१

पुटमेतत् सुपुष्टितम्

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ग्रन्थ-ग्रन्थकर्तृवर्णानुक्रमणिका

रहस्यान्नाय , (र आ.) ४५, ६५, ६७ , ७७, ७८. ९४, ११५, १५८, १७० रामानुज –श्री, (दृश्यता भाष्यकार ) रामायणम्-श्रीमत् (रामा अ-अमोध्या - काण्ड सु-सुन्दरकाण्ड) १६० वङ्गिवशेश्वर, (व) ५२, ८९, ९२, ९६, १११, ११२, १२३, १२७, १४२, १५३, १७७ वराहपुराणम्, (व पु) २८, ३०, ६५ , ११८, ११९, १२०, १२१, १२२, १२३, १४३, १४४, १४५, १४६ वासिष्ठसंहिता, २३ वासुदेवस्वामी, (वा स्वा) २५ विखना , २१ विज्ञानेश्वर, (वि ) २७ विष्णुधर्म (शौनकीय), (वि ध) ७५, ७७, ८८, ९३, ९७, १३५, १४० , १४९, १६३, १६९ विष्णुपुराणम्, (वि पु) ६८, ८५ , १५८, १६५, १७४ विष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्, (वि स ) ६१ विष्णुस्मृति, (वि स्मृ) १३४ विहगेन्द्रसंहिता, २३ वृद्धवासिष्ठस्मृति, (वृ वा) १३६ वैकुण्ठगद्यम्, (वै ग) ५७, १५९, १६०, १६१ वैखानसशास्त्रम्, (वै शा) २३, ११४ , १२३, १६३ वैखानससूत्रम्, (वै) २१ वैशम्पायन , ४३ वैहायससंहिता, ४० व्यास, (व्या) २४, ४३, ४९, ५५, ६०, ६७, ७६, १२६, १४७ व्यासस्मृति (लघुव्याससहिता), (व्या स्मृ) ४९, ५५, ६०, ६१, ६२, ६३, ६४, ६५, ६६, ६७, ६८, ६९, १०३,१७३ शरणागतिगद्यम्, (श ग) ५७, १३९ शाण्डिल्यस्मृति , (शा स्मृ) ५२, ५९, ६२, ८७, ११४, १३४, १५८, १६६ शातातपसंहिता, ४० शारीरकमीमांसा, (शा मी) २, २७, ७६, ८५, ८६, १४२, १६६, १७१ शुक , १४७ शुकप्रश्न', ४० शैवागम, (कारणातन्त्रम् दृश्यता कामिकागम ) शौनक, (शौ) २१,५५,७१,८८, १३५ , १४०, १४७, १६३, १६९, १७९ शौनकीयसूत्रम्, (शौ सू ) ६५, ७१, ८८ श्रीकरसंहिता, (श्री स) ३०, ३१, ३२ श्रीकृष्णमुनि , (श्री, कृ) २,५९, ६०,८७ श्रीभागवतम्, (दृश्यता भागवतम् ) श्रीभाष्यम्, (श्री भा) ८, ८६ श्रीरङ्गनारायणाचार्य, (दृश्यता वङ्गिवशेश्वर.) श्रीरङ्गराजस्तव, (श्रीर स्त) ३ श्रीवत्साङ्कमिश्र (अभिगमनसारकर्ता) (श्री व) १११ श्रीवैष्णवधर्मशास्त्रम्, (दृश्यता च म भा आश्व) (श्री ध) २४, ४९, ८१, १०७, १२६, १२९.