पृष्ठम्:श्रीपाञ्चरात्ररक्षा.djvu/२९४

एतत् पृष्ठम् परिष्कृतम् अस्ति

प्रमाणवचनादीना वर्णानुक्रमणिका 229 सर्वेषा रञ्जकं गूढ २९ मा स्म 22-52 सर्वे करणैर्नमन् ११५ र आ सर्वोपाधिविनिर्मुक्त ७६ द स्मृ 7-21 सव्य पाद प्रसाये १३७, १८० पा र सव्याहृति सप्रणवा १०६ म 6-70 ससामान्यविशेषात्मा ४५ पा र ससूत्रसुमनस्तोमा ४५ पा रै सस्मितालोकमधुर १५६ व 480 सह तेनैव वै निद्रा १६४, सा स 6-193 सहस्र इति विज्ञेय १०८ अ ब्र सहस्ररश्मि भगवन्त १०९ पि स हि सर्वस्य जगत ४१ पार स 10-376 स ह्यम्पुपगमो न्याये १२ न्या वि सहरेदुत्थितो योगात् १६५, पा सं 13-78 संहारक्रममाश्रित्य १६५, पा स 13-76 सात्विकेन तु पूजाद्य ४० पार स 10-328 सादर स्वेन शिरसा १५ वं 473 साधयेद्विविधानर्थान् ६२ व्या स्मृ 2-8 साधि प्रहर विप्र ४८ ज स्म 22-71 साधित परतन्त्रे य १२ न्या वेि सान्तानिकै प्रविष्टैव ३५ का सान्य कर्माखिल साधु ११२ व 77 सामग्र्येषा हेि सपूर्णा १७८, व 519 साय प्रातर्द्विजातीना १२९, १५0 साय प्रात सदा सन्ध्या ११३ वि ध सार्गली योनिमाश्रित्य ११९ व पु 45 सावधानाश्च तिष्ठन्तु १५७ व 492 सा हानिस्तन्महच्छिद्र ७२

                                      सि
       सा                      सिद्धान्तसकरस्तस्मातू ११ पा स

साक्षाद्भगवतो विष्णो १७५, अ ब्र (ना) (च) 19-125 साख्ययोगकृतान्तेन २ म भा (शा) सिद्धान्तसंकरे जाते ११ पा स (च) 348 63 19-126 साकर्यमागमाना च २९ सा स 22-49 सिद्धान्तसज्ञा विप्रास्य ७ पौ सं 38-307 साङ्कुराणि व पत्राणि १२८ सा 21-29 सिद्धान्ताना चतुर्णा तु १५ पा स साङ्केत्य पारिहास्य वा १७३ श्री भाग (च) 21-73 6-2-14 सिद्धान्तेषु चतुष्वेंक १५ पा स (च) साङ्गेन केवलेनाथ १२ पार स (प्रा) 21-74 19-575 साङ्गेषु वेदेषु निष्ठा २५ सु सात्वत विधिमास्थाय २० म भा सुकृती किंपुनर्यावत् १७६, ना मु (भी.) 66-40 सुगन्धीनि मनोज्ञानि १२७ ना भु