प्रमुखा विकल्पसूचिः उद्घाट्यताम्
← अध्यायः ११५ ब्रह्मपुराणम्
अध्यायः ११६
वेदव्यासः
अध्यायः ११७ →
  1. अध्यायः १
  2. अध्यायः २
  3. अध्यायः ३
  4. अध्यायः ४
  5. अध्यायः ५
  6. अध्यायः ६
  7. अध्यायः ७
  8. अध्यायः ८
  9. अध्यायः ९
  10. अध्यायः १०
  11. अध्यायः ११
  12. अध्यायः १२
  13. अध्यायः १३
  14. अध्यायः १४
  15. अध्यायः १५
  16. अध्यायः १६
  17. अध्यायः १७
  18. अध्यायः १८
  19. अध्यायः १९
  20. अध्यायः २०
  21. अध्यायः २१
  22. अध्यायः २२
  23. अध्यायः २३
  24. अध्यायः २४
  25. अध्यायः २५
  26. अध्यायः २६
  27. अध्यायः २७
  28. अध्यायः २८
  29. अध्यायः २९
  30. अध्यायः ३०
  31. अध्यायः ३१
  32. अध्यायः ३२
  33. अध्यायः ३३
  34. अध्यायः ३४
  35. अध्यायः ३५
  36. अध्यायः ३६
  37. अध्यायः ३७
  38. अध्यायः ३८
  39. अध्यायः ३९
  40. अध्यायः ४०
  41. अध्यायः ४१
  42. अध्यायः ४२
  43. अध्यायः ४३
  44. अध्यायः ४४
  45. अध्यायः ४५
  46. अध्यायः ४६
  47. अध्यायः ४७
  48. अध्यायः ४८
  49. अध्यायः ४९
  50. अध्यायः ५०
  51. अध्यायः ५१
  52. अध्यायः ५२
  53. अध्यायः ५३
  54. अध्यायः ५४
  55. अध्यायः ५५
  56. अध्यायः ५६
  57. अध्यायः ५७
  58. अध्यायः ५८
  59. अध्यायः ५९
  60. अध्यायः ६०
  61. अध्यायः ६१
  62. अध्यायः ६२
  63. अध्यायः ६३
  64. अध्यायः ६४
  65. अध्यायः ६५
  66. अध्यायः ६६
  67. अध्यायः ६७
  68. अध्यायः ६८
  69. अध्यायः ६९
  70. अध्यायः ७०
  71. अध्यायः ७१
  72. अध्यायः ७२
  73. अध्यायः ७३
  74. अध्यायः ७४
  75. अध्यायः ७५
  76. अध्यायः ७६
  77. अध्यायः ७७
  78. अध्यायः ७८
  79. अध्यायः ७९
  80. अध्यायः ८०
  81. अध्यायः ८१
  82. अध्यायः ८२
  83. अध्यायः ८३
  84. अध्यायः ८४
  85. अध्यायः ८५
  86. अध्यायः ८६
  87. अध्यायः ८७
  88. अध्यायः ८८
  89. अध्यायः ८९
  90. अध्यायः ९०
  91. अध्यायः ९१
  92. अध्यायः ९२
  93. अध्यायः ९३
  94. अध्यायः ९४
  95. अध्यायः ९५
  96. अध्यायः ९६
  97. अध्यायः ९७
  98. अध्यायः ९८
  99. अध्यायः ९९
  100. अध्यायः १००
  101. अध्यायः १०१
  102. अध्यायः १०२
  103. अध्यायः १०३
  104. अध्यायः १०४
  105. अध्यायः १०५
  106. अध्यायः १०६
  107. अध्यायः १०७
  108. अध्यायः १०८
  109. अध्यायः १०९
  110. अध्यायः ११०
  111. अध्यायः १११
  112. अध्यायः ११२
  113. अध्यायः ११३
  114. अध्यायः ११४
  115. अध्यायः ११५
  116. अध्यायः ११६
  117. अध्यायः ११७
  118. अध्यायः ११८
  119. अध्यायः ११९
  120. अध्यायः १२०
  121. अध्यायः १२१
  122. अध्यायः १२२
  123. अध्यायः १२३
  124. अध्यायः १२४
  125. अध्यायः १२५
  126. अध्यायः १२६
  127. अध्यायः १२७
  128. अध्यायः १२८
  129. अध्यायः १२९
  130. अध्यायः १३०
  131. अध्यायः १३१
  132. अध्यायः १३२
  133. अध्यायः १३३
  134. अध्यायः १३४
  135. अध्यायः १३५
  136. अध्यायः १३६
  137. अध्यायः १३७
  138. अध्यायः १३८
  139. अध्यायः १३९
  140. अध्यायः १४०
  141. अध्यायः १४१
  142. अध्यायः १४२
  143. अध्यायः १४३
  144. अध्यायः १४४
  145. अध्यायः १४५
  146. अध्यायः १४६
  147. अध्यायः १४७
  148. अध्यायः १४८
  149. अध्यायः १४९
  150. अध्यायः १५०
  151. अध्यायः १५१
  152. अध्यायः १५२
  153. अध्यायः १५३
  154. अध्यायः १५४
  155. अध्यायः १५५
  156. अध्यायः १५६
  157. अध्यायः १५७
  158. अध्यायः १५८
  159. अध्यायः १५९
  160. अध्यायः १६०
  161. अध्यायः १६१
  162. अध्यायः १६२
  163. अध्यायः १६३
  164. अध्यायः १६४
  165. अध्यायः १६५
  166. अध्यायः १६६
  167. अध्यायः १६७
  168. अध्यायः १६८
  169. अध्यायः १६९
  170. अध्यायः १७०
  171. अध्यायः १७१
  172. अध्यायः १७२
  173. अध्यायः १७३
  174. अध्यायः १७४
  175. अध्यायः १७५
  176. अध्यायः १७६
  177. अध्यायः १७७
  178. अध्यायः १७८
  179. अध्यायः १७९
  180. अध्यायः १८०
  181. अध्यायः १८१
  182. अध्यायः १८२
  183. अध्यायः १८३
  184. अध्यायः १८४
  185. अध्यायः १८५
  186. अध्यायः १८६
  187. अध्यायः १८७
  188. अध्यायः १८८
  189. अध्यायः १८९
  190. अध्यायः १९०
  191. अध्यायः १९१
  192. अध्यायः १९२
  193. अध्यायः १९३
  194. अध्यायः १९४
  195. अध्यायः १९५
  196. अध्यायः १९६
  197. अध्यायः १९७
  198. अध्यायः १९८
  199. अध्यायः १९९
  200. अध्यायः २००
  201. अध्यायः २०१
  202. अध्यायः २०२
  203. अध्यायः २०३
  204. अध्यायः २०४
  205. अध्यायः २०५
  206. अध्यायः २०६
  207. अध्यायः २०७
  208. अध्यायः २०८
  209. अध्यायः २०९
  210. अध्यायः २१०
  211. अध्यायः २११
  212. अध्यायः २१२
  213. अध्यायः २१३
  214. अध्यायः २१४
  215. अध्यायः २१५
  216. अध्यायः २१६
  217. अध्यायः २१७
  218. अध्यायः २१८
  219. अध्यायः २१९
  220. अध्यायः २२०
  221. अध्यायः २२१
  222. अध्यायः २२२
  223. अध्यायः २२३
  224. अध्यायः २२४
  225. अध्यायः २२५
  226. अध्यायः २२६
  227. अध्यायः २२७
  228. अध्यायः २२८
  229. अध्यायः २२९
  230. अध्यायः २३०
  231. अध्यायः २३१
  232. अध्यायः २३२
  233. अध्यायः २३३
  234. अध्यायः २३४
  235. अध्यायः २३५
  236. अध्यायः २३६
  237. अध्यायः २३७
  238. अध्यायः २३८
  239. अध्यायः २३९
  240. अध्यायः २४०
  241. अध्यायः २४१
  242. अध्यायः २४२
  243. अध्यायः २४३
  244. अध्यायः २४४
  245. अध्यायः २४५
  246. अध्यायः २४६


अथ षोडशाधिकशततमोऽध्यायः
वडवादिसहस्रतीर्थवर्णनम्
ब्रह्मोवाच
महानलमिति ख्यातं वडवानलमुच्यते।
महानलो यत्र देवो वडवा यत्र सा नदी।। ११६.१ ।।

तत्तीर्थं यत्र वक्ष्यामि मृत्युदोषजरापहम्।
पुराऽऽसन्नैमिषारण्ये ऋषयः सत्रकारिणः।। ११६.२ ।।

शमितारं च ऋषयो मृत्युं चक्रुस्तपस्विनः।
वर्तमाने सत्रयागे मृत्यौ शमितरि स्थिते।। ११६.३ ।।

न ममार तदा कश्चिदुभयं स्थास्तु जङगमम्।
विना पशून्मुनिश्रेष्ठ मर्त्यं चामर्त्यतां गतम्।। ११६.४ ।।

ततस्त्रिविष्टपे शून्ये मर्त्ये चैवातिसंभृते।
मृत्युनोपेक्षिते देवा राक्षसानूचिरे तदा।। ११६.५ ।।

देवा ऊचुः
गच्छध्वमृषिसत्रं तन्नाशयध्वं महाध्वरम्।

ब्रह्मोवाच
इति देववचः श्रुत्वा प्रोचुस्ते राक्षसाः सुरान्।। ११६.६ ।।

असुरा ऊचुः
विध्वंसयामस्तं यज्ञमस्माकं किं फलं ततः।
प्रवर्तते विना हेतुं न कोऽपि क्वापि जातुचित्।। ११६.७ ।।

ब्रह्मोवाच
देवा अप्यसुरानूचुर्यज्ञार्धं भवतामपि।
भवेदेव ततो यान्तु ऋषीणां सत्रमुत्तमम्।। ११६.८ ।।

ते श्रुत्वा त्वरिताः सर्वे यत्र यज्ञः प्रवर्तते।
जग्मुस्तत्र विनाशाय देववाक्याद्विशेषतः।। ११६.९ ।।

तज्ज्ञात्वा ऋषयो मृत्युमाहुः किं कुर्महे वयम्।
आगता देववचनाद्राक्षसा यज्ञनाशिनः।। ११६.१० ।।

मृत्युना सह संमन्त्र्य नैमिषारण्यवासिनः।
सर्वे त्यक्त्वा स्वाश्रमं तं शमित्रा सह नारद।। ११६.११ ।।

अग्निमात्रमुपादाय त्यक्त्वा पात्रादिकं तु यत्।
क्रतुनिष्पत्तये जग्मुगौर्तमीं प्रति सत्वराः।। ११६.१२ ।।

तत्र स्नात्वा महेशानं रक्षणायोपतस्थिरे।
कृताञ्जलिपुटास्ते तु तुष्टुवुस्त्रिदशेश्वरम्।। ११६.१३ ।।

ऋषय ऊचुः
यो लीलया विश्वमिदं चकार, धाता विधाता भुवनत्रयस्य।
यो विश्वरूपः सदसत्परो यः, सोमेश्वरं तं शरणं व्रजाम्।। ११६.१४ ।।

मृत्युरुवाच
इच्छामात्रेण यः सर्वं हन्ति पाति करोति च।
तमहं त्रिदशेशानं शरणं यामि शंकरम्।। ११६.१५ ।।

महानलं महाकायं महानागविभूषणम्।
महामूर्तिधरं देवं शरणं यामि शंकरम्।। ११६.१६ ।।

ब्रह्मोवाच
ततः प्रोवाच भगवान्मृत्यो का प्रीतिरस्तु ते।। ११६.१७ ।।

मृत्युरुवाच
राक्षसेभ्यो भयं घोरमापन्नं त्रिदशेश्वर।
यज्ञमस्मांश्च रक्षस्व यावत्सत्रं समाप्यते।। ११६.१८ ।।

ब्रह्मोवाच
तथा चकार भगवांस्त्रिनेत्रो वृषभध्वजः।
शमित्राः मृत्युना सत्रमृषीणां पूर्णतां ययौ।। ११६.१९ ।।

हविषां भागधेयाय आजग्मुरमराः क्रमात्।
तानवोचन्मुनिगणाः संक्षुब्धा मृत्युना सह।। ११६.२० ।।

ऋषय ऊचुः
अस्मन्मखविनाशाय राक्षसाः प्रेषिता यतः।
तस्माद्भवद्भ्यः पापिष्ठा राक्षसाः सन्तु शत्रवः।। ११६.२१ ।।

ततः प्रभृति देवानां राक्षसा वैरिणोऽभवन्।
कृत्यां च व़डवां तत्र देवाश्च ऋषयोऽमलाः।। ११६.२२ ।।

मृत्योर्भार्या भव त्वं तामित्युक्त्वा तेऽभ्यषेचयत्।
अभिषेकोदकं यत्तु सा नदी वडवाऽभवत्।। ११६.२३ ।।

मृत्युना स्तापितं लिङ्गं महानलमिति श्रुतम्।
ततः प्रभृति तत्तीर्थं वडवासंगमं विदुः।। ११६.२४ ।।

महानलो यत्र देवस्तत्तीर्थं भुक्तिमुक्तिदम्।
सहस्रं तत्र तीर्थानां सर्वाभीष्टप्रदायिनाम्।।
उभयोस्तीरयोस्तत्र स्मरणादघघातिनाम्।। ११६.२५ ।।

इति श्रीमहापुराणे आदिब्राह्मो तीर्थमाहात्म्ये व़डवादिसहस्रतीर्थवर्णनं नाम षोडशाधिकशततमोऽध्यायः।। ११६ ।।

गौतमिमाहात्म्ये सप्तचत्वारिंशोऽध्यायः।। ४७ ।।